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मेरी डायरी से

November 1, 2011
  गुम चोट


खुला  घाव होता तो दिखा भी देते
खून रिसता होता, तो बता भी देते

अब क्या शिकायत करें किसी से
जब अपनों ने दी हो, सिर्फ गुम चोट |

अपने आंसु की वजह क्या बताएं अब
उतरे चेहरे का सबब क्या समझाएं तुम्हे

पढ़ सको तो पढ़ लो तुम ही
हमारी ख़ामोशी में है एक गुम चोट |


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